Education
Sunday, 29 January 2017
कक्षा :– ५ एकम :– १०. सीखो कवि :- श्रीनाथसिंहजी को अर्पण
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| Poem |
- फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना । (2)
- तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना ।
सीख हवा के झोंको से लो, कोमल भाव बहाना ।
दूध तथा पानी से सीखो, मिलना और मिलाना ।
सूरज
की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ।
लता
और पेडों से सीखो, सबको गले लगाना ।
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