Sunday, 29 January 2017

कक्षा :– ५  एकम :– १०. सीखो      कवि :- श्रीनाथसिंहजी को अर्पण

Poem



  1. फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना (2)
  2. तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना ।

    सीख हवा के झोंको से लो, कोमल भाव बहाना ।
    दूध तथा पानी से सीखो, मिलना और मिलाना ।
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ।
लता और पेडों से सीखो, सबको गले लगाना ।
    
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तडपकर मरना
     पतझड़ के पेडों से सीखो, दुःख में धीरज धरना
दीपक से सीखो जितना हो, सके अँधेरा हरना
पृथ्वी से सीखो प्राणी की, सच्ची सेवा करना
     जलधारा से सीखो आगे, जीवनपथ में बढ़ना
     और धूए से सीखो हरदम, ऊंचे ही पर चढना
फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना (2)


कुत्ता – वफादारी
हंस – नीर-क्षीरवृत्ति
सियार – चतुराई
बुलबुल – मधुर गान
मधुमक्खी – परिश्रम
अगरबत्ती – सुवास फैलाना, परोपकार
नदी – अविरत गति
चींटी – परिश्रम
मकड़ी – सतत प्रयास

कंगारू – मातृप्रेम
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